Phoolwari Gardens

Waste management is one of the biggest issue towards achieving Sustainable Development, issue is more critical in developing countries.

Our simple but most comprehensive idea to convert all abandoned gardens and vacant land near all urban areas into “Phoolwari Gardens“ a self sustainable project to convert home waste to valuable manure , also providing shelter to homeless man and deserted animals.

परिचय

वेस्ट मैनेजमेंट कचरे के पुन: इस्तेमाल का तरीका है। इसमें कचरे को नष्ट करने की बजाय इसे रिसाइकिल किया जाता है। हमारे देश में फिलहाल वेस्ट मैनेजमेंट के लिए पर्याप्त तकनीक नहीं है और न ही इसे लेकर जागरूकता है, लेकिन कचरा पैदा करने में अग्रणी देश होने की वजह से यह जरूरी होता जा रहा है कि हम इसके बारे में जानें। कचरा बढ़ने की प्रमुख वजह जनसंख्या वृद्धि और तेज आर्थिक विकास है। देश में पैदा होने वाला लगभग 80% कचरा कार्बनिक उत्पादों, गंदगी और धूल कर मिश्रण होता है।

वेस्ट मैनेजमेंट तीन तरह से होता है। पहले में जमीन में गड्ढा खोदकर कचरे को गाढ़ना। दूसरा तरीका कचरे को एक जगह इकट्ठा कर उसे जलाना और तीसरे में रिसाईकिल कर कचरे का पुन: उपयोग। यह तरीका सबसे ज्यादा लाभदायक है क्योंकि इसमें हम काम में लाई जाने वाली दूसरी चीजें बना सकते हैं। देश में वर्ष 2000 से पहले कचरे को रिसाईकिल कर उससे उपयोगी सामान तैयार करने की कोई नीति नहीं थी। उसी वर्ष यह नीति बनी थी। अप्रैल 2004 से इस नीति को लागू किया गया, हालांकि प्रभावी तरीके से इस पर काम नहीं हो पा रहा है।

साफ सफाई के साथ कचरा निस्तारण का मसला भी जड़ा हुआ है। आज बढ़ते शहरीकरण की वजह से भारत जैसे विकासशील देशों में कचरा प्रबंधन एक बड़ी समस्या के रूप में सामने आया है। हमने अपने शहरों के पास कचरों के पहाड़ कर दिए हैं, इन खतरनाक पहाड़ों की ऊंचाई और चौड़ाई में दिनों दिन इजाफा ही हो रहा है क्योंकि देश में प्रतिदिन 1 लाख 60 हजार मिट्रिक टन कचरे की पैदावार होती है। राजधानी दिल्ली में 1950 से लेकर आज तक 12 बड़े कचरे के ढेर बनाये जा चुके हैं जो कि सात मंजिल तक ऊँचे हैं, मुंबई का सबसे बड़ा कचरा संग्रह 110 हेक्टेयर में फैला देवनार कचरा स्थल है। यहाँ पर 92 लाख टन कचरे का ढेर लग चूका है। यही हाल अन्य महानगरों और शहरों का भी है।

यह कचरा जन स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। कचरे से रिस कर जहरीला रसायन भूमि, हवा और पानी को दूषित कर रहा है और इनके पास रहने वाली आबादी अनेक गंभीर बीमारियों जैसे मलेरिया, टीबी, दमा और चर्म रोगों से ग्रसित हैं।

कचरे के प्रकार                                                                                                                                                      घरेलु कचरा            –   सब्जी और फल के छिलके , बासी भोजन  ताजे हो तो गायों को डाला जा सकता है.  पोलिथीन में भरकर ना फेकें,  अलग रखें.

कागज                          –   रद्दी में बेचे, पेपर मैशी बनाने वालो को दे.

माचीस की तिलियां –   किसी डब्बे में भरकर रखें और कचरे में डालें.

पालिथीन बैग्स         –      इकट्ठी कर के रखे और रद्दी में दें

तेल, घी, नुडल्स,  शेम्पू, के पाउच इत्यादी       –     रद्दी वाले नहीं लेते कचरे में डालें

थर्मोकोल ,टुटे कांच,कागज, कपडे, इत्यादी. –     रद्दी में दे दे.

घर के कचरे को अलग अलग रखने की आदत डाले. किसी भी कचरे को जलाएं नहीं.

आफिस स्कूलों से निकलने वाले कचरे

कागज, कापी              – बिक जाते है

थर्मोकोल                    – बस्ट आउट आफ वेस्ट या कचरे वाले को

पुट्ठे या कार्टुन            – बिक जाते है, रिसाइकल हो जाते हैं.

पालिथिन बैग्स         – इकट्ठा करके रद्दी वाले को दे दे.

पेन, पेन कि रिफिल – डेकोरेटीव चिजे बनाइ जा सकती है

कम्प्युटर. सी.डी.      – जमा कर के रखे, डेकोरेटिव चिजे बनाये

फाइल्स इत्यादि        – जमा कर के बेच देवें.

वर्तमान वेस्ट मैनेजमेंट

·        घरों से कचरा सडको पर या थोडी दुर नालियों में फेका जाता है,

·        लोग घरों के कचरा इकट्ठा करके मेन सडक के मुक्कड में फेक देते है.

·        दुकानों में दुकानदार पास ही नालीयों में डंप करते है. वो कचरे वाले का इंतेजार नहीं करते

·        अस्पताल वाले भी पास ही के नाले में सारा मेडिकल वेस्ट फेक देते है.

·        एकत्र कचरे को जला दिया जाता है, जिसमे अनेक मात्रा मे प्लास्टिक होता है जो की बहुत ज़्यादा हानिकारक है

·        जाकरुकता और जानकारी के अभाव में कचरों को मिला दिया जाता है.

घरों ,में एक ही प्रकार के कचरे निकलते है जो आसानी से नियोजित किया जा सकता है

 

 

फूलवारी गार्डेन

इस अभियान के तहत शहर के कुछ अनुपयोगी गार्डेन/ जगह को वेस्ट मॅनेज्मेंट गार्डने के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव संस्था देती है, एक फूलवारी गार्डेन में आसपास के करीब 100 से 500 घरो के कचरे का निस्पादन किया जा सकता है I यह गार्डेन ना सिर्फ़ सुंदरता प्रदान करेंगे बल्कि सरकार के स्वस्थ भारत अभियान के तहत मिल का पत्थर साबित हो सकता है I

फूलवारी गार्डेन की विशेषता :

– आस पास के घरो के कचरे का निस्पादन.

– आवारा पशु जैसे गाय/ भैस को रखने की व्यवस्था.

– वर्मी कॉम्पोस्ट पीट का निर्माण

– वर्मी खाद दुवारा फल सब्जी का उत्पादन इत्यादि I

Project concept by :

Partnered by : Toppers Educational Society , Society for Sustainable Development

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